Wednesday, October 15, 2008

आज में ऊपर आस्मां नीचे


कल्पना व सुनीता विलियम्स मैं बन जाऊं
आ इ ई भूल, अब राकेट पर जाऊं

5 comments:

सचिन मिश्रा said...

Bahut badiya.

ANIL YADAV said...

तो जा न। टोपी घर क्यों छोड़ आई। वहां वो भी तेरी तरह तैरती रहती। जब चाहे उसके नीचे सिर घुसा के पहन लेती। जा।

pawan said...

apke painting bahut achi hai
aise he banate rehna
best of luck

RAJEEV said...

aise hi lagi raho bahut acha vaasatav mai ik din aap upar aour aasama neeche hoga
how can i contact you yamini
im so impressed by you

डा०आशुतोष शुक्ल said...

कल्पना की उड़ान के भी आगे जाने की चाह ही सफलता दिलाती है... बधाइयाँ...